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Sugar Price News : देशभर में चीनी के दाम लगातार बढ़ते नजर आ रहे हैं जिसको लेकर देश में जनता काफी ज्यादा परेशान हो रही है और उसको लेकर लगातार सवाल भी उठ रहे हैं कैसे अचानक से चीनी के दाम कैसे बढ़ रहे हैं और सरकार इस पर क्या कर रही है। बीते दो हफ्तों में चीनी के दाम लगभग 20% से भी अधिक बढ़ते नजर आ रहे हैं हालांकि अलग-अलग जगह पर चीनी के दाम अलग-अलग और उसमें कुछ अंतर भी दिखाई दे रहा है लेकिन यह अंतर एक बड़े अंतर की ओर तो नहीं लेकिन बड़े हुए अंतर को जरूर दिखा रहा है। चीनी के बढ़ते दाम अब राजनीतिक मामला भी बन चुका है और विपक्ष के नेता जैसे अरविंद केजरीवाल इस पर लगातार आवाज उठा रहे हैं।
देशभर में चीनी के दाम में 15 से 20% की वृद्धि देखने को मिल रही है और आमतौर पर चीन के दाम ₹60 से लेकर ₹70 के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे हैं। देश के कुछ हिस्सों में चीनी के दाम ₹80 प्रति किलो भी देखे जा रहे हैं हालांकि यह ग्रामीण स्तर पर बहुत छोटी दुकानों के मूल्य है। आमतौर पर चीनी के दाम औसतन 65 रुपए के आसपास चल रहे हैं जो इसके पिछले दाम लगभग 45 रुपए से काफी ज्यादा है। उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में चीनी के दाम औसतन 65 से ₹70 देखे जा रहे हैं वहीं महाराष्ट्र में चीनी के दाम ₹60 से ₹65 के बीच में देखे जा रहे हैं।
देशभर में चीनी के दाम में हो रही वृद्धि को लेकर अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं इनमें पहला कारण देशभर में चीनी उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली फसल है जैसे गाना और मक्का की फसलों के एक बड़े हिस्से के खराब होने को बताया जा रहा है तो दूसरी ओर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि देश में एथेनॉल के उत्पादन को लेकर गाने और मक्के का जो हिस्सा चीनी उत्पादन के लिए इस्तेमाल होता था अब वह एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल हो रहा है। विपक्षी दलों में अरविंद केजरीवाल और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बेहद सक्रिय नजर आए और आम आदमी पार्टी के साथ ही समाजवादी पार्टी भी इस विषय पर बेहद सकरी नजर आई।
देश की केंद्र सरकार ने चीनी के बढ़ते दामों को लेकर स्पष्ट किया है कि उसका कारण मुख्य रूप से देश में चीनी उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली फसलों का नष्ट हो जाना है इसके अतिरिक्त सरकार किसी भी प्रकार से चीनी के उत्पादन को प्रभावित करने वाली गतिविधि में शामिल नहीं है। यहां आपको बताते चलें कि देश में इससे पहले भी देखी गयी हैं। वर्ष 2012-13 मैं चीनी के दामों में वृद्धि देखने को मिली थी इसके साथ ही वर्ष 2010 में भी इस तरह की परेशानियां देश की जनता को झेलनी पड़ी थी।
भारत के चीनी उत्पादन की बात की जाए तो कल 300 से 325 लाख टन चीनी का उत्पादन देश में होता है हालांकि यह आंकड़े थोड़े अलग भी हो सकते हैं और देश में चीनी की खपत को लेकर बात करें तो यह 250 से 280 लाख टन की है। और अगर एथेनॉल के उत्पादन में चीनी की भूमिका को लेकर बात करें तो 50 लाख तन से भी काम चीनी की उपलब्धता को एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर आंकड़ों पर जाएं तो एथेनॉल उत्पादन के कारण चीनी की उपलब्धता को लेकर कोई भी प्रभाव करने वाला बिंदु नहीं दिखता है। आमतौर पर भारत पिछली कई वर्षों से चीनी को अन्य कई देशों में निर्यात करता रहा है।
चीनी के बढ़ते दाम को लेकर सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं जिसमें स्टॉक जमा करने और दाम में हेरा फेरी करने और निर्धारित दम से ऊपर बेचने वाले व्यापारियों को चिन्हित करके उन पर कार्रवाई की जा रही है और यह कार्रवाई गंभीर हो रही है। छोटे व्यापारियों को 1 टन और मध्यम स्तर के व्यापारियों को 4 टन से अधिक स्टॉक जमा रखने की इजाजत नहीं है और अगर ऐसा करती कोई पाया जाता है तो उसके खिलाफ गंभीर और कठोर कार्रवाई की जा रही है इसके साथ ही सरकार मूल्य में फिर बदल को लेकर भी लगातार नजर बनाए हैं जिससे चीनी के दाम एक निश्चित मूल्य से ऊपर न बढ़ सके।
सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से स्टॉक की उपलब्धता पर गंभीर असर पड़ रहा है और उससे आने वाले कुछ दिनों में ही चीनी के दाम नीचे आ सकते हैं। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को भी अनेक दिशा निर्देश जारी किए हैं और जिले के संबंधित विभागों को भी इस समस्या से निपटने के लिए गंभीर कदम उठाने और चीनी के दाम को लेकर संबंधित बिंदुओं पर नजर रखने की बात कही गयी है। इस विषय में कुछ व्यापारियों का मानना है कि इस कदम से चीनी के दाम 10 से 12% तक नीचे आ सकते हैं।