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लखनऊ, उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार एक बार फिर से चर्चा में आ गई है और कारण है ₹50000 की राशि को उत्तर प्रदेश की महिलाओं को देना हालांकि अभी तक इस बात की कोई सरकार द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स जिसमें देश के कई मीडिया संस्थान जैसे टाइम्स आफ इंडिया और अन्य कई प्रतिष्ठित न्यूज़ पोर्टल शामिल है उनकी रिपोर्ट्स इस विषय पर रिपोर्ट्स की गई है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश की महिलाओं को जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाएं और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को विशेष रूप से ₹50000 की आर्थिक सहयोग राशि दिए जाने की बात की जा रही है हालांकि एक बार पुनः यहां हम दोहराना चाहते हैं कि इसकी कोई सरकार द्वारा भी पुष्टि नहीं हुई है। सरकार इस योजना के अंतर्गत ₹50000 की आर्थिक सहयोग राशि महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए देगी जिसमें व्यवसाईयों को बढ़ावा देना और आर्थिक रूप से मजबूत महिलाओं को सशक्त बनाना लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश की महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में इस योजना के लाभ की राशि को भेजा जाएगा और इस राशि का इस्तेमाल करके वह अपने व्यवसाय को और अन्य विकल्प जो उत्तर प्रदेश की सरकार तय करेगी उसमें इस राशि को इस्तेमाल कर सकती हैं। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया क्या होगी और किस प्रकार से महिलाओं को चिन्हित किया जाएगा इसके संदर्भ में इस योजना के आधिकारिक रूप से स्पष्ट होने के बाद ही जानकारी दी जा सकती है।
इस योजना के अंतर्गत ₹50000 की जो राशि है वह महिलाओं को एक से अधिक किस्तों में दिया जाएगा और इसमें सबसे पहले ₹20000 की राशि दी जाएगी उसके बाद ₹10000 की राशि तीन बार पुणे दी जाएगी जिससे उनकी ₹50000 की रकम उनके बैंक खाते में पहुंच जाएगी।
उत्तर प्रदेश की सरकार ने अभी तक इस योजना की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी है इस कारण से इस पर कोई स्पष्ट जानकारी हम नहीं दे पाएंगे जो भी जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर हमारे पास उपलब्ध है उसकी जानकारी हम आप तक लेकर आए हैं इसके साथ ही योजना को लेकर विरोध भी सामने आ रहा है जिसमें विपक्ष के कई नेता इस बात का आरोप लगा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले इस योजना का लागू होना और चुनाव से पहले किसी भी प्रकार की आर्थिक सहयोग राशि देना यह पूरी तरह से गैर संवैधानिक है और इस बात के लिए चुनाव आयोग को सामने आकर इस तरह की योजनाओं पर रोक लगनी चाहिए।
बीते कुछ महीना पहले ही बिहार के चुनाव से पहले भी इस तरह की योजनाएं देखने को मिलती हालांकि इस तरह की योजनाओं को लेकर सवाल जरूर उठाते हैं लेकिन कई बार इसका उद्देश्य और लक्ष्य सभी प्रकार के प्रश्नों को खारिज कर देता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि उत्तर प्रदेश सरकार इस योजना की आधिकारिक घोषणा कब करती है और उत्तर प्रदेश की महिलाओं को इस योजना का लाभ कब मिलता है।